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नशीली दवाओं के दुरुपयोग के बारे में जागरूकता पैदा करने के लिए प्रदेश में शुरू होगा पाक्षिक अभियान

चंडीगढ़ 28 नवंबर।
सुनील कुमार जांगड़ा.

हरियाणा के मुख्य सचिव डॉ.विवेक जोशी ने आज यहां 9वीं नार्को समन्वय (एन.सी.ओ.आर.डी.) की राज्य स्तरीय समिति की बैठक की अध्यक्षता की। कानून प्रवर्तन, स्वास्थ्य, शिक्षा और समाज कल्याण विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ हुई इस बैठक में प्रदेश में नशीली दवाओं के दुरुपयोग और तस्करी के खतरे से निपटने के लिए़ चलाए जा रहे अभियानों की समीक्षा करने के साथ-साथ भावी रणनीतियों की रूपरेखा भी तैयार की गई। बैठक में प्रवर्तन, पुनर्वास और जागरूकता प्रयासों के संयोजन से नशीली दवाओं से जुड़े मुद्दों से निपटने के लिए हरियाणा के समग्र दृष्टिकोण पर बल दिया गया।

मुख्य सचिव ने प्रदेश को नशा मुक्त बनाने की दिशा में हुई प्रगति की सराहना करते हुए नशीली दवाओं की तस्करी की चुनौतियों से निपटने के लिए सतर्कता, अंतर-विभागीय समन्वय और प्रौद्योगिकी के उपयोग की आवश्यकता पर बल दिया।
डॉ. जोशी ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के “नशा मुक्त हरियाणा” के दृष्टिकोण के अनुरूप एक पखवाड़े तक चलने वाले अभियान की शुरुआत करने का आह्वान किया। उन्होंने न केवल स्कूल और कॉलेजों के छात्रों के लिए बल्कि शिक्षण संस्थानों के बाहर भी युवाओं को मादक द्रव्यों के सेवन के खतरों के बारे में जागरूक करने के लिए प्रदर्शनियां और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने का सुझाव दिया। उन्होंने निर्देश दिए कि इन पहलों को फेसबुक, यूट्यूब और एक्स (पूर्व में ट्विटर) जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर तत्परता से प्रचारित किया जाना चाहिए ताकि अधिक से अधिक लोगों तक इनकी पहुंच और जुड़ाव हो सके।

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उपायुक्तों और पुलिस अधीक्षकों की मौजूदगी में हुई इस बैठक में मुख्य सचिव ने स्थानीय एसडीएम द्वारा नशा मुक्ति केंद्रों के नियमित निरीक्षण की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने मानकों का अनुपालन सुनिश्चित करने और इन केंद्रों के संचालन में जवाबदेही में सुधार करने के लिए, अधिकारियों को 10 दिनों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। डॉ. जोशी ने नशा मुक्ति कार्यक्रमों को सफलतापूर्वक पूरा करने वाले व्यक्तियों के पुनर्वास के महत्व पर भी बल दिया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि कौशल विकास और रोजगार के अवसर प्रदान करने के लिए एक समर्पित सेल बनाया जाए ताकि ये लोग फिर से समाज की मुख्यधारा में शामिल होकर सकारात्मक जीवन जी सकें।
हरियाणा राज्य मादक पदार्थ नियंत्रण ब्यूरो के महानिदेशक श्री ओ.पी. सिंह ने एनडीपीएस एक्ट के तहत मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ हरियाणा की लड़ाई में हासिल हुई महत्वपूर्ण प्रगति का जिक्र करते हुए बताया कि प्रदेश में जनवरी से नवंबर, 2024 तक 3,005 मामले दर्ज किए गए और 4,523 व्यक्तियों की गिरफ्तारी की गई। इनमें से 819 लोग वाणिज्यिक मात्रा में मादक पदार्थ रखने के आरोपी थे।
इस सघन कार्रवाई के फलस्वरूप एनडीपीएस मामलों में दोषसिद्धि दर में भी उल्लेखनीय सुधार हुआ और इस वर्ष 428 व्यक्तियों को दोषी ठहराया गया। यह कानूनी जवाबदेही सुनिश्चित करने दिशा में एक बड़ी उपलब्धि है। इसके अलावा, 27 किलोग्राम हेरोइन, 265 किलोग्राम चरस, 8,520 किलोग्राम गांजा और 10 लाख से अधिक फार्मास्यूटिकल ड्रग्स भी जब्त की गई। इसके अलावा, मादक पदार्थों के तस्करों से जुड़ी 52.72 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की गई, जिससे मादक पदार्थों के नेटवर्क को जबरदस्त वित्तीय झटका लगा है।
‘हरियाणा उदय’ पहल के तहत 2,495 से अधिक नशा विरोधी जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें 16.43 लाख से अधिक लोगों ने हिस्सा लिया। नशीली दवाओं की लत के खतरों के प्रति जागरूकता फैलाने और इसमें सामुदायिक भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में प्रकाश और ध्वनि शो “राम गुरुकुल गमन” जैसे अनूठे और प्रभावशाली अभियान चलाए गए। जिला पुलिस द्वारा नशा मुक्त वार्डों, पंचायतों और गांवों को बढ़ावा देने के लिए उठाए गए सक्रिय कदमों से से नशा विरोधी प्रयासों में जमीनी स्तर पर भागीदारी को बढ़ावा मिला है।
इसके अलावा, राज्य की प्रहरी पहल के माध्यम से नशा करने वाले 7,523 व्यक्तियों की पहचान की गई और 572 को हरियाणा राज्य नारकोटिक्स नियंत्रण ब्यूरो द्वारा पेशेवर नशा मुक्ति सहायता के लिए निर्देशित किया गया। मानदंडों का अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए राज्य भर में नशा मुक्ति केंद्रों का नियमित रूप से निरीक्षण किया जा रहा है। प्रदेश में 104 केंद्रों में से 99 केंद्र मानकों के अनुरूप काम करते पाए गए, जबकि मानकों के अनुरूप न पाए जाने पर एक केंद्र पर मामला दर्ज किया गया। सेवा विभाग के सहयोग से नशा मुक्ति केंद्रों के लिए एक रेटिंग प्रणाली विकसित की गई है, जिसका उद्देश्य सेवा की गुणवत्ता का मूल्यांकन और सुधार करना है। यह प्रणाली बुनियादी ढांचे, जनशक्ति और समग्र सेवा गुणवत्ता जैसे मापदंडों पर केंद्रों का मूल्यांकन करेगी। बैठक में बताया गया कि सभी सरकारी नशा मुक्ति केंद्रों में बच्चों के लिए 5 बिस्तर आरक्षित किए जा रहे हैं और अब निजी केंद्रों में भी ऐसा ही किया जा रहा है।

बैठक में गृह, जेल, आपराधिक जांच और न्याय प्रशासन के अतिरिक्त मुख्य सचिव श्री अनुराग रस्तोगी, सामाजिक न्याय, अधिकारिता, अनुसूचित जाति एवं पिछड़ा वर्ग कल्याण और अंत्योदय (सेवा) विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव जी. अनुपमा, प्रमुख सचिव, उच्च शिक्षा विभाग, डी. सुरेश, खाद्य एवं औषधि प्रशासन के आयुक्त अशोक कुमार मीणा तथा शिक्षा, स्वास्थ्य और पुलिस विभागों के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।

By HUWeb

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