

गुरुग्राम.01 जनवरी।
सुनील कुमार जांगड़ा.
परिश्रम से महानता तक कहा जाता है कि सफलता उम्र की मोहताज नहीं होती, बल्कि परिश्रम, अनुशासन और दृढ़ संकल्प की मांग करती है। ऐसा ही एक महान व्यक्तित्व है पंडित आदित्य पारीक, जिन्हें लोग प्यार से भैय्या जी भी पुकारते है, भैय्या जी ने बहुत कम उम्र में अपने अथक परिश्रम और मजबूत इच्छाशक्ति के बल पर महानता का शिखर छू लिया।
उनका जीवन साधारण परिस्थितियों में शुरू हुआ। संसाधन सीमित थे, सुविधाएँ कम थीं, लेकिन उसके सपने बड़े थे। जब अधिकांश लोग कठिनाइयों से घबराकर पीछे हट जाते हैं, तब पंडित आदित्य पारीक ने उन्हें अपनी ताकत बना लिया। वह हर असफलता से सीखते गये और हर दिन खुद को पहले से बेहतर बनाने का प्रयास करता रहे।
कम उम्र में ही उन्होंने यह समझ लिया था कि सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता। नियमित अभ्यास, समय का सही उपयोग और आत्मविश्वास—यही उनके जीवन के मूल मंत्र है। उन्होंने न केवल अपने लक्ष्य को प्राप्त किया, बल्कि अपने आचरण और कार्यों से दूसरों के लिए भी प्रेरणा प्रस्तुत की।
पंडित आदित्य पारीक एक कुशल और दूरदर्शी वास्तुकार भी हैं, और पूज्य पंडित धीरेंद्र शास्त्री जी के अतिप्रिय शिष्यों में से एक है,जिन्होंने अपने कार्य से न केवल इमारतों को आकार दिया है, बल्कि विश्वास और मूल्यों की एक मजबूत नींव भी रखी है। वास्तुकला के क्षेत्र में उनकी पहचान उनके गहन ज्ञान, सृजनात्मक दृष्टि और कार्य के प्रति समर्पण से बनी है। प्रत्येक परियोजना में वे सौंदर्य, उपयोगिता और संतुलन का ऐसा समन्वय प्रस्तुत करते हैं, जो उन्हें अन्य वास्तुकारों से अलग पहचान देता है।
परिश्रम पंडित आदित्य पारीक के व्यक्तित्व का एक प्रमुख गुण है। वे हर कार्य को पूरी लगन और सूक्ष्मता के साथ करते हैं। कठिन परिस्थितियों में भी धैर्य बनाए रखना और समाधान खोजने की उनकी क्षमता सराहनीय है। साथ ही, उनकी ईमानदारी उन्हें एक भरोसेमंद पेशेवर बनाती है। वे अपने कार्य में पारदर्शिता और नैतिक मूल्यों को सर्वोपरि रखते हैं, जिससे उनके साथ कार्य करने वाले लोग स्वयं को सुरक्षित और सम्मानित महसूस करते हैं।
सरलता उनके स्वभाव की सबसे सुंदर विशेषताओं में से एक है। उपलब्धियों के बावजूद उनका व्यवहार सहज, विनम्र और सहयोगी है। वे अपने ज्ञान और अनुभव को दूसरों के साथ साझा करने में कभी संकोच नहीं करते। पंडित आदित्य पारीक न केवल एक उत्कृष्ट वास्तुकार हैं, बल्कि एक ऐसे व्यक्तित्व के धनी भी हैं, जो समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उनके सद्गुण, कार्यनिष्ठा और मानवीय दृष्टिकोण उन्हें सच्चे अर्थों में प्रशंसा के योग्य बनाते हैं। उनकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि सफलता मिलने के बाद भी वह विनम्र बने रहना। भैय्या जी ने समाज को कुछ लौटाने का संकल्प लिया और अपने अनुभवों से युवाओं को मेहनत और ईमानदारी का महत्व समझाया। आज उनका नाम केवल उनकी उपलब्धियों के कारण नहीं, बल्कि उनके चरित्र और संघर्ष के कारण सम्मान के साथ लिया जाता है।
ऐसे व्यक्ति हमें यह सिखाते हैं कि यदि संकल्प मजबूत हो और मेहनत सच्ची हो, तो कम उम्र कोई बाधा नहीं, बल्कि एक अवसर बन सकती है। उनका जीवन हम सभी के लिए प्रेरणा है कि हम भी अपने सपनों को साकार करने के लिए पूरे मन से प्रयास करें ।